मुम्बई । नव भारत मुंबई के रिपोर्टर और डेस्क इंचार्ज तक को पता ही नहीं है कि संयुक्त पुलिस आयुक्त और सहायक पुलिस आयुक्त में फर्क क्या है... आज नव भारत प्लस के चार नम्बर पेज पर भिवंडी की एक खबर छपी जिसका हैडिंग थी "अलहुसैनी कमेटी ने कराया सामूहिक विवाह, सहायक पुलिस आयुक्त ने दिया आशीर्वाद".
Dec 28, 2015
धर्म विशेष के खिलाफ नकारात्मक लिखने से पहले सौ बार सोचें... देखिए, इनके खिलाफ हो गया एफआईआर
वाट्सएप पर मुस्लिमों के बारे में घटिया टिप्पणी करने वाले कथित पत्रकार के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में एक कथित पत्रकार पर आई टी एक्ट के तहत मामला दर्ज़ हुआ है. कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ थाणे में राजेश मंगतानि नाम के व्यवसायी पर मुस्लिम समुदाय पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में आई टी एक्ट की धारा 66क लगी है। घटना के संबंध में मनेन्द्रगढ़ के शिकायतकर्ता ने बताया की राजेश मंगतानि ख़ुद को "सहारा समय mp cg का पत्रकार बताता है।
Hindi - Rashtrabhasha? Time has come to examine, why this did not become possible so far
(i) There has been little effort to improve the quality of work being done in Hindi. There are Hindi FB posts where spelling mistakes are common. It seems 'Anuswar' doesn't exist.
(ii) Those who have been given responsibility of 'Hindi Dept.' in Government, Public Sector and other such organizations haven't done enough. Most of them have acted like 'budget hogs'.
(ii) Those who have been given responsibility of 'Hindi Dept.' in Government, Public Sector and other such organizations haven't done enough. Most of them have acted like 'budget hogs'.
Dec 27, 2015
मनुस्मृति दहन दिवस : ब्राह्मणवादी मीडिया में इस पर बहुत तगड़ी प्रतिक्रिया हुयी...
-एस आर दारापुरी-
25 दिसम्बर का दिन दलितों के लिए " मनुस्मृति दहन दिवस" के रूप में अति महतवपूर्ण दिन है। इस दिन ही सन 1927 को " महाड़ तालाब" के महा संघर्ष के अवसर पर डॉ. बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर ने खुले तौर पर मनुस्मृति जलाई थी। यह ब्राह्मणवाद के विरुद्ध दलितों के संघर्ष की अति महतवपूर्ण घटना है। अतः इसे गर्व से याद किया जाना चाहिए।
25 दिसम्बर का दिन दलितों के लिए " मनुस्मृति दहन दिवस" के रूप में अति महतवपूर्ण दिन है। इस दिन ही सन 1927 को " महाड़ तालाब" के महा संघर्ष के अवसर पर डॉ. बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर ने खुले तौर पर मनुस्मृति जलाई थी। यह ब्राह्मणवाद के विरुद्ध दलितों के संघर्ष की अति महतवपूर्ण घटना है। अतः इसे गर्व से याद किया जाना चाहिए।
Dec 21, 2015
गाजीपुर के पत्रकारों ने सुरक्षा को लेकर ज्ञापन सौंपा
गाजीपुर। देश व प्रदेश में निष्पक्ष पत्रकारिता को लेकर मुखर हो रहे पत्रकारों पर आये दिन हमले व स्वच्छ व निष्पक्ष पत्रकारिता को प्रभावित करने वाले कारपोरेट के हस्तक्षेप को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग को लेकर बैठक की गई। बैठक में ‘‘पत्रकार सुरक्षा कानून’’ के गठन को लेकर चर्चा की गई। यह बैठक दिनांक 21.12.2015 को कचहरी स्थित कैम्प कार्यालय पर हुई। इसमें सभी पत्रकारों ने अपनी-अपनी समस्याओ को पटल पर रखा और 16 सूत्रीय मांगपत्र तैयार किया गया।
गंगा के चलते एक बार फिर उपेक्षा का शिकार हुई ताप्ती
जानकारी मांगने पर पीएमओ के पास नहीं कोई ठोस योजना
बैतूल। सदियों पहले गंगा ने धरती पर आने से पहले शर्त रखी थी कि वह तभी धरती पर अवतरीत होगी जब सूर्यपुत्री ताप्ती का महात्मय विलोपित हो। भागीरथ के पूर्वजो के उद्धार के लिए देवऋषि नारद ने ताप्ती महात्मय को विलोपित करने का जो महापाप किया आज वही महापाप देश की एनडीए सरकार और देश का प्रधानमंत्री कार्यालय कर रहा है। मध्यप्रदेश आरटीआई एक्टीविस्ट फोरम के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मां सूर्यपुत्री ताप्ती जागृति समिति मध्यप्रदेश के अध्यक्ष रामकिशोर पंवार द्वारा पुण्य सलिला सूर्यपुत्री ताप्ती की उपेक्षा को लेकर पीएमओ कार्यालय तथा भारत सरकार के जल संसाधन , नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय को 15 नवम्बर 2015 को सूचना के अधिकार कानून के तहत प्रथक - प्रथक आवेदन प्रस्तुत कर 6 बिन्दुओं पर जानकारी मांगी गई लेकिन देश का पीएमओं और जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय आवेदक को जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए सिर्फ कागजी घोड़े ही दौड़ा रहा है। बीते सवा महीने में श्री पंवार को तीन पत्र ऐसे प्राप्त हुए है जिसकी भाषा सिर्फ जानकारी देने के बजाय इसके उसके सर पर टोपी पहनाने का है।
A film on female infanticide, Sinking India
Friday evening saw a number of Filmmakers of Delhi Circuit attending the screening of a short film ‘Sinking India’ at the Friendship Film Festival organized in collaboration with the Russian Centre of Science & Culture. Sinking India a short film highlighting the issue of female infanticide which is a matter of great importance.
Dec 18, 2015
गोंडा जेल में चार दिन तक चला 9वां अयोध्या फिल्म फेस्टिवल
क्रांतिवीर राजेंद्र नाथ लाहिड़ी के बलिदान दिवस पर गोंडा जेल में 9वें अयोध्या फिल्म फेस्टिवल का आयोजन शुरू हुआ। यह आयोजन 19 दिसंबर तक चलेगा। अवाम का सिनेमा नाम से यह फिल्म फेस्टिवल हर साल अयोध्या फिल्म सोसाइटी द्वारा आयोजित किया जाता है। क्रांतिकारी राजेंद्र नाथ लाहिड़ी के बलिदान दिवस से शुरू हुए इस कार्यक्रम में दूसरे दिन तरंग सिनेमा मे ‘आज़ाद हिन्द सरकार के सौ बरस’ पर सेमिनार, प्रदर्शनी और फिल्म का प्रदर्शन होना है। गौरतलब है कि 1 दिसंबर 2015 को आजाद हिंद सरकार के 100 बरस पूरे हो गए। 1 दिसंबर 1915 को काबुल के बाग-ए-बाबर, में राजा महेंद्र प्रताप ने क्रांतिकारियों की सरकार के पहले राष्ट्रपति और गदर पार्टी के नायक मौलाना बरकतुल्लाह भी प्रथम प्रधानमंत्री होने की शपथ ली थी। भारतीय क्रांतिकारियों की इस सरकार के ऐलान ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी थी।
Amole Gupte to write and direct a biopic on the life of Indian Badminton champ, Saina Nehwal
Mumbai, December 18,2015: Great news for all sports fans! A biographical sports drama based on the life of Indian badminton champ Saina Nehwal is in the offing. Mumbai-based Front Foot Pictures Pvt Ltd, a new age content creation company, has acquired the rights to make a biopic on the life of India's ace shuttler, Saina Nehwal. The acclaimed writer-actor-director, Amole Gupte has been roped in to write and direct the much-awaited film.
Dec 16, 2015
हक रक्षक दल द्वारा अनार्य विचार क्रान्ति अभियान शुरू
हक रक्षक दल (एचआरडी) के राष्ट्रीय प्रमुख डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' के नेतृत्व में 13 दिसम्बर को औपचारिक रूप से 'अनार्य—विचार—क्रान्ति' अभियान की सफल शुरूआत की गयी। सभा के मंच पर मेहतर जाति के एक व्यक्ति हाथ से हक रक्षक दल के राष्ट्रीय प्रमुख द्वारा ओक से पानी पीकर छुआछूत मिटाने की ऐतिहासिक शुरूआत की गयी। पूर्वी राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्र में यह अपने आप में बड़ी घटना है। हिण्डौन—करौली रोड पर स्थित गांव रीठोली में आयोजित 'अनार्य जनजागरण सभा' में मुस्लिम अल्पसंख्यक, ओबीसी, दलित और आदिवासी वर्गों के अनेक जाति समूहों के लोगों द्वारा सक्रिय रूप से भाग लिया गया। अनार्य जनजागरण सभा में शामिल सभी आयु समूह के समर्पित स्त्री—पुरुषों ने लगातार छह घंटे तक अनार्य—विचार—क्रान्ति के बारे में उत्सुकता से जानकारी प्राप्त की। अनेक पुरस्कारों से सम्मानित लेखक और हक रक्षक दल के राष्ट्रीय प्रमुख डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' ने अनार्य जनजागरण सभा को सम्बोधित करते हुए बताया कि...
Dec 15, 2015
अखबार के स्थापना दिवस पर कवि सम्मेलन : उसको फूल देता हूं, वो मुंह पर थूक देती है...
नौगढ़ : चन्दौली जनपद का प्रथम प्रकाशन गांव गिरांव के 12वें वर्षगांठ व हिन्दी दैनिक संस्करण के 9वें स्थापना दिवस पर नौगढ़ स्थित विकास खण्ड परिसर सभागार में कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। सोमवार को रात्रि 8 बजे अतिथि द्वय अजवेंन्द्र कश्यप व वन क्षेत्राधिकारी शमसुल हुद्दा सिद्दकी ने मां सरस्वती के प्रतिमा पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्वलन कर सम्मेलन का विधिवत् उद्घाटन किया। काव्य पाठ्य का शुम्भारम्भ विभा शुक्ला के सरस्वती वन्दना से हुआ।
Dec 14, 2015
किसी अमर उजाला कर्मी ने नशे में लगाई होगी ये हेडिंग!
अमर उजाला अखबार में छपी यह हेडिंग देखिए. लगता है नशे की अवस्था में किसी ने हेडिंग लगाई है और क्या का क्या हो गया, उसे पता ही नहीं चला.
गेस्टहाउस की आड़ में चलाता था सेक्स रैकेट... अपने को सन्मार्ग का पत्रकार कहता था
Kunal Kishor : एक छद्म पत्रकार जो अपने को हिंदी दैनिक सन्मार्ग, पटना का संवाददाता दिखाकर इसी नाम से एक फेसबुक पेज भी चलाता था तथा इसी रौब से अपने आप को प्रशासन, पुलिस और बाजार में स्थापित करता था, सेक्स रैकेट चलाने के आरोप में धरा गया है.
Insult to Bhagat Singh / Freedom struggle by Haryana Govt.
Dear All
Would you feel concerned at this? How many of you know Mangal Sen? Is he bigger than Shaheed Bhagat Singh? Haryana Govt. led by RSS diehard ML Khattar(A Punjabi himself) thinks so. He rescinds Haryana state assembly's unanimous resolution to name Chandigarh airport on the name of Bhagat Singh and instead insists on naming it on Mangal Sen-a one time diehard RSS prachark of Haryana! This is love of RSS/BJP for Bhagat Singh and other revolutionaries, whose name they use day and night to hit at their political adversaries!But now cat is out of bag-their love for Bhagat Singh stands exposed and they heap insults on Bhagat Singh and all revolutionaries of freedom struggle.
Would you feel concerned at this? How many of you know Mangal Sen? Is he bigger than Shaheed Bhagat Singh? Haryana Govt. led by RSS diehard ML Khattar(A Punjabi himself) thinks so. He rescinds Haryana state assembly's unanimous resolution to name Chandigarh airport on the name of Bhagat Singh and instead insists on naming it on Mangal Sen-a one time diehard RSS prachark of Haryana! This is love of RSS/BJP for Bhagat Singh and other revolutionaries, whose name they use day and night to hit at their political adversaries!But now cat is out of bag-their love for Bhagat Singh stands exposed and they heap insults on Bhagat Singh and all revolutionaries of freedom struggle.
राजस्थान पत्रिका उदयपुर ने किया शिक्षकों का अपमान
राजस्थान पत्रिका उदयपुर संस्करण की और से 6 दिसंबर को उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया सभागार में संभाग स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। 8 दिसंबर को पेज 4 पर पत्रिका ने उस समारोह के फ़ोटो छापे। इसमे राज्य के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया, पूर्व काबिना मंत्री डॉ, गिरिजा व्यास के भी फ़ोटो हैं। पहली नज़र में यह खुशनुमा न्यूज़ पैकेज लगता है लेकिन एक कोने में विज्ञापन लिखना पूरी कहानी अपने आप कह देता है।
Dec 11, 2015
मानवाधिकार दिवस और भारत के अनार्य : पता नहीं, कौन किसके लिये चिन्तित है?
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
सर्वदित है कि सारे संसार में औपचारिक रूप से 10 दिसंबर को हर वर्ष मानव अधिकार दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1948 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 10 दिसंबर को इसके हर साल इसे मनाये जाने की घोषणा की थी। तब मावन अधिकारों की सार्वभौमिक संरक्षा के लिये संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिवर्ष इसे मनाया जाता है। विश्व की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा भारत में रहता है। भारत की कुल आबादी का 90 फीसदी (अनार्य) हिस्सा मानव अधिकारों से वंचित है। जिसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि देश के मात्र 10 फीसदी लोगों द्वारा 90 फीसदी लोगों की लोकतांत्रिक ताकत को संविधान की आड़ में गिरवी रख रखा है। भारतीय लोकतंत्र में कागजी तौर पर जनता अपने प्रतिनिधि चुनती है, जबकि वास्तविकता यह है कि राजनैतिक दलों पर काबिज 10 फीसदी आर्य महामानवों द्वारा, जिन लोगों को नामित किया जाता है, उनके नाम पर ठप्पा लगाने का काम जनता करती है। इससे बड़ा मानव अधिकार हनन क्या होगा?
सर्वदित है कि सारे संसार में औपचारिक रूप से 10 दिसंबर को हर वर्ष मानव अधिकार दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1948 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 10 दिसंबर को इसके हर साल इसे मनाये जाने की घोषणा की थी। तब मावन अधिकारों की सार्वभौमिक संरक्षा के लिये संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिवर्ष इसे मनाया जाता है। विश्व की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा भारत में रहता है। भारत की कुल आबादी का 90 फीसदी (अनार्य) हिस्सा मानव अधिकारों से वंचित है। जिसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि देश के मात्र 10 फीसदी लोगों द्वारा 90 फीसदी लोगों की लोकतांत्रिक ताकत को संविधान की आड़ में गिरवी रख रखा है। भारतीय लोकतंत्र में कागजी तौर पर जनता अपने प्रतिनिधि चुनती है, जबकि वास्तविकता यह है कि राजनैतिक दलों पर काबिज 10 फीसदी आर्य महामानवों द्वारा, जिन लोगों को नामित किया जाता है, उनके नाम पर ठप्पा लगाने का काम जनता करती है। इससे बड़ा मानव अधिकार हनन क्या होगा?
Protest against Shinzo Abe's visit in Mumbai, Vizag, Koodankulam, Jadugoda, Tokyo and Osaka
More protests tomorrow
As part of the International Protests Against the India-Japan Nuclear Agreement, citizens groups and communities at grassroots today organised protests on the occasion of Japanese PM Shinzo Abe's visit to India. Many eminent intellectuals, artists, film-makers, doctors and social activists participated in these protests. We demand termination of nuclear deal's negotiations.
As part of the International Protests Against the India-Japan Nuclear Agreement, citizens groups and communities at grassroots today organised protests on the occasion of Japanese PM Shinzo Abe's visit to India. Many eminent intellectuals, artists, film-makers, doctors and social activists participated in these protests. We demand termination of nuclear deal's negotiations.
Dec 10, 2015
अंतरराष्ट्रीय हर्बल मेला में आने वालों को मिल सकता है धोखा, औषधि की जगह मिल सकता सरसों का उबला तेल और एलोपेथिक दवा मिला पाउडर!
भोपाल : 11 दिसंबर 2015 से म.प्र. सरकार के सानिध्य में आयोजित भोपाल में अंतराष्ट्र्रीय हर्बल मेले का आयोजन किया जा रहा है, इस मेले की वैसे तो नाम के हिसाब से बहुत उपयोगिता है, बहुत आवश्यकता है और प्रदेश के लिए गर्व की बात है, परंतु इसके विपरीत देखने में आ रहा है कि हर साल सरकार द्वारा इस तरह के आयोजन किए जाते हैं वे सिर्फ भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा योजनावद्ध तरीके से शासकीय धन का उपयोग करके इनको अपने नीजी लाभ साधने से अधिक कुछ नहीं है।
Joint protest outside Delhi Police Headquarter against brutal police repression of the OccupyUGC protesting students (see pictures)
Delhi : Scores of students today came out to against the brutal police repression of the Students protesting the scrapping of non NET fellowship and the privatization of education outside Delhi Police headquarters. Yesterday when the students had taken out a march to Parliament the Police had erected layers of barricades to prevent the students from carrying out their peaceful march. Women protesters were manhandled, grabbed from their hair, groped and dragged on the roads beaten brutally targeting their private parts. All this was carried out by male Police personals of Delhi Police, several students were gravely injured. Several rounds of tear gas shells were wired at the gathering, the students were water cannoned and brutally beaten by the Delhi Police.
Dec 8, 2015
मुंबई की मीडिया में ठाकुरवाद और ब्राह्मणवाद के कारण टैलेंटेड पत्रकार ठोकर खा रहे
माननीय संपादक जी, मेरा नाम राहुल तिवारी (बदला नाम). मैं पिछले 2 वर्षो से मीडिया जगत में काम कर रहा हूँ। मुझे ख़ुशी इस बात की है कि मीडिया में अधिकतर लोग उत्तर भारतीय है और खूब नाम भी कमाए है। दुःख इस बात का भी है कि वही उत्तर भारतीय मेरी नौकरी के पीछे भी पढ़ गए है। उनके ना चाहने से मेरा काम पिछले 2 वर्षों से रुका हुआ है। मैं बताना चाहूँगा कि मीडिया में ठाकुरवाद (सिंह) और ब्राह्मणवाद ज्यादा ही देखने को मिल रहा है। ठाकुर के लोग सिर्फ ठाकुर के लोगों को रखवा रहे हैं और ब्राह्मण के लोग सिर्फ ब्राह्मण को। इस दोनों गुटो में जो काबिल है वो पीछे रह जा रहा है ।
सुब्रत राय ने तिहाड़ में सुविधाओं के लिए चुकाए 1.23 करोड़ रूपये
दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद सहारा ग्रुप के चीप सुब्रत रॉय के बारे में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। खुलासे में बात सामने आई है कि सुब्रत राय ने जेल में स्पेशल फैसिलिटी के लिए1.23 करोड़ रुपए जेल अथॉरिटी दिए। ये पैसे वहां के स्पेशल सेल के लिए भेजे गए। उसे एक एसी रूम में वाई-फाई, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, लैपटॉप, डेस्कटॉप और स्टेनोग्राफर की फैसिलिटी दी गई थी। रकम निवेशकों को वापस करने के लिए रॉय को अपनी प्रापर्टी बेचनी थी। यह कहकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई कि उन्हें डील करने के लिए अलग से जगह मुहैया कराई जाए।
सहारा इण्डिया कामगार संगठन लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत कर्मचारियों के हित की लड़ाई लड़ते रहेंगे
प्रिय सहयोगियों,
हम सभी कई वर्षों से सहारा इण्डिया के साथ जुड़े हुए हैं। हममें से कई सहयोगी पच्चीस वर्ष से सँस्थान में हैं। सहारा इण्डिया हमारे लिये कर्म मंदिर है। यही कारण है कि संस्थान पर जब भी विपरीत परिस्थितियां आई हम डरे नहीं, भागे नहीं बल्कि अपने संस्थान के मुखिया के साथ डट कर संघर्ष किया। पिछले करीब दो वर्षों से ऐसा ही संघर्ष हम कर रहे हैं। इस संघर्ष के दौरान हमें तनख्वाह नहीं मिली उसके बावजूद हम संस्थान के साथ रहे। हमारे वरिष्ठों ने जब प्रति सहयोगी से दस हजार रुपये जमा कराने का सहयोग मांगा हमने अपनी आर्थिक परेशानियों को भूलकर रूपये संस्थान में जमा करवाए। हमारे मुखिया ने संघर्ष की इस घड़ी में शांतिपूर्ण और निष्ठा बनाए रखने का आह्वान किया तो उस पर हम चलने लगे। लेकिन मित्रों हम तो नहीं बदले लेकिन संस्थान के नियम,कानून बदल गये। यहां जैसा कि आप सभी को पता है कनिष्ठ और मध्यम स्तर पर कर्मियों के तबादले और टर्मीनेशन शुरू कर दिया गया है। यह सब उस दौर में किया जा रहा है जब हमारे करीब आठ महीने की तनख्वाह बकाया है। हमारे भविष्य निर्वाह निधि की राशी तनख्वाह से काटी तो गई पर हमारे बगैर जानकारी के यह सरकार के पास जमा नहीं किया गया।
हम सभी कई वर्षों से सहारा इण्डिया के साथ जुड़े हुए हैं। हममें से कई सहयोगी पच्चीस वर्ष से सँस्थान में हैं। सहारा इण्डिया हमारे लिये कर्म मंदिर है। यही कारण है कि संस्थान पर जब भी विपरीत परिस्थितियां आई हम डरे नहीं, भागे नहीं बल्कि अपने संस्थान के मुखिया के साथ डट कर संघर्ष किया। पिछले करीब दो वर्षों से ऐसा ही संघर्ष हम कर रहे हैं। इस संघर्ष के दौरान हमें तनख्वाह नहीं मिली उसके बावजूद हम संस्थान के साथ रहे। हमारे वरिष्ठों ने जब प्रति सहयोगी से दस हजार रुपये जमा कराने का सहयोग मांगा हमने अपनी आर्थिक परेशानियों को भूलकर रूपये संस्थान में जमा करवाए। हमारे मुखिया ने संघर्ष की इस घड़ी में शांतिपूर्ण और निष्ठा बनाए रखने का आह्वान किया तो उस पर हम चलने लगे। लेकिन मित्रों हम तो नहीं बदले लेकिन संस्थान के नियम,कानून बदल गये। यहां जैसा कि आप सभी को पता है कनिष्ठ और मध्यम स्तर पर कर्मियों के तबादले और टर्मीनेशन शुरू कर दिया गया है। यह सब उस दौर में किया जा रहा है जब हमारे करीब आठ महीने की तनख्वाह बकाया है। हमारे भविष्य निर्वाह निधि की राशी तनख्वाह से काटी तो गई पर हमारे बगैर जानकारी के यह सरकार के पास जमा नहीं किया गया।
कानपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों के खिलाफ हुआ मुकदमा, कोर्ट खुद करेगी सुवाई
कानपुर। एस.आर.न्यूज़ द्वारा किये गए मुक़दमे में स्पेशल सीजेएम गगन कुमार भारती की कोर्ट ने इस मामले को गंभीर से लेते हुए अपनी कोर्ट में परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया है, कोर्ट खुद अब मुक़दमे की सुनवाई करेगी।
Dec 7, 2015
टाइम्स आफ इंडिया की बदमाशी का नित्यानंद ने दिया जवाब
टाइम्स आफ इंडिया के अहमदाबाद मिरर में एक खबर छपी है जिसका जवाब खबर में उल्लखित नित्यानंद सिन्हा ने दिया है. पहले खबर पढ़ें, फिर जवाब...
Bombay high court bars ex-Tata general manager
from boss bashing on Facebook
Ahmedabad Mirror | Nov 15, 2015, 02.14 PM IST
former high-ranking employee who took to social media to allegedly defame his employer after his services were terminated. The Bombay high court, which ruled in the company's favour, has imposed a fairly comprehensive gag order on the disgruntled worker, asking him to remove all material deemed libelous and forbidding him from making any disparaging remarks about a wide section of Tata employees.
Bombay high court bars ex-Tata general manager
from boss bashing on Facebook
Ahmedabad Mirror | Nov 15, 2015, 02.14 PM IST
former high-ranking employee who took to social media to allegedly defame his employer after his services were terminated. The Bombay high court, which ruled in the company's favour, has imposed a fairly comprehensive gag order on the disgruntled worker, asking him to remove all material deemed libelous and forbidding him from making any disparaging remarks about a wide section of Tata employees.
धन लोलुप मालिकान और उनके चमचे संपादकों को मीडिया की विश्वसनीयता की चिंता नहीं
पुरुषोत्तम असनोड़ा
राष्ट्रीय प्रेस दिवस आया और चला गया। इस मौके पर प्रेस की बदहाली पर आंसू बहाने के अलावा शायद ही कुछ किया गया हो। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का उपयोग निहित स्वार्थी पूंजी और प्रभाव के लिए जिस तरह कर रहे हैं उससे प्रेस की आजादी, उसकी विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े हुए हैं और भविष्य में वह अपने अन्तरविरोधों और कुकर्मों के चलते हाशिये पर खडी नजर आये तो बहुत आश्चर्य नहीं होगा।
बनारस हिंदुस्तान में समाचार संपादक का आतंक, पांच का इस्तीफा
हिंदुस्तान बनारस में समाचार संपादक रजनीश त्रिपाठी के आतंक के चलते इन दिनों भगदड़ मची हुयी है। उनके घटिया व्यवहार के चलते पिछले एक महीने में यहाँ से चीफ सब एडिटर संजीव सिंह, सीनियर सब एडिटर आशुतोष सिंह, सब एडिटर हृदयेश राय, सब एडिटर चेतन शर्मा, अजीत पंवार आदि संस्थान से नाता तोड़ चुके हैं। खुद को शशि शेखर का करीबी बताने वाले रजनीश त्रिपाठी स्थानीय संपादक नागेन्द्र प्रताप को भी कुछ नहीं समझते हैं। वो कई बार नागेन्द्र प्रताप को सार्वजनिक रूप से अपमानित कर चुके हैं।
required marketig staffs and reporters for anniversary issue and regulars
'द डे आफ्टर मंथ' राष्ट्रीय पत्रिका ने अपने ५ साल पुरे कर लिए और जमीनी अस्तर पर एक अलग पहचान बनायीं है. इसके प्रधान संपादक श्री अशोक झा जो अपनी एक अलग कंपनी प्रगति मीडिया के नाम से भी चलते हैं ने इसे एक मुकाम तक ले जाने का और जमीनी स्टार पर लोगो से एक संवाद स्थापित करने का बीड़ा उठाया है. आजकल पत्रिका निकलने के पीछे कोई किसी का मकसद नहीं जनता पर द डे का मकसद सिर्फ हकीकत को सामने लाना और जनता और नेता के बीच एक संवाद स्थापित करना है.
झारखण्ड जर्नलिस्ट असोसिएशन की नयी टीम...
झारखण्ड जर्नलिस्ट असोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष शहनवाज़ हसन के नेतृत्व में कल पांच सदस्य प्रतिनिधि मंडल झारखण्ड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मु से मिलकर झारखंड में मजेठिया आयोग की सिफारिशों को लागू करने का आग्रह करेंगे. झारखण्ड जर्नलिस्ट असोसिएशन की नयी टीम.
IFWJ : Eventful session at Mathura
To
All members of Working Committee, Presidents & General Secretaries of State Units/Spl. Invitees.
Friends,
The last session of the present Working Committee at Mathura (28-30 November 2015) was eventful in many ways. Top on its agenda was a dialogue on the conduct of Mediapersons and urgent need for stricter code . Speakers from 16 state units, included H.B. Madan Gowda (Bangalore), Dr. Debashish Bose and Abhijit Pandey(Bihar), Arvind Awasthi (Chhattisgarh), AJB Sagyar (Tamil Nadu), Pranshu Mishra (Times Now, Lucknow), Ramdutt Tripathi (ex-BBC, Lucknow) and Salman Khan (M.P). IFWJ President Com.K.Vikram Rao pleaded for a stronger, united journalist organization to ensure better professional conduct . Com .Vikram Rao urged the U.P. Cabinet minister Shivpal Yadav to summon state labour minister and his officials to secure the implementation of the Majithia wage award. Com. Rao was a member of the Majithia wage board. Com. Paramanand Pandey outlined the progress of the Supreme Court hearing of the wage award. Next hearing is on December 15. In his concluding address senior cabinet minister Shivpal Singh Yadav wanted appraisals in the media of the government policies to be more informed and objective.
All members of Working Committee, Presidents & General Secretaries of State Units/Spl. Invitees.
Friends,
The last session of the present Working Committee at Mathura (28-30 November 2015) was eventful in many ways. Top on its agenda was a dialogue on the conduct of Mediapersons and urgent need for stricter code . Speakers from 16 state units, included H.B. Madan Gowda (Bangalore), Dr. Debashish Bose and Abhijit Pandey(Bihar), Arvind Awasthi (Chhattisgarh), AJB Sagyar (Tamil Nadu), Pranshu Mishra (Times Now, Lucknow), Ramdutt Tripathi (ex-BBC, Lucknow) and Salman Khan (M.P). IFWJ President Com.K.Vikram Rao pleaded for a stronger, united journalist organization to ensure better professional conduct . Com .Vikram Rao urged the U.P. Cabinet minister Shivpal Yadav to summon state labour minister and his officials to secure the implementation of the Majithia wage award. Com. Rao was a member of the Majithia wage board. Com. Paramanand Pandey outlined the progress of the Supreme Court hearing of the wage award. Next hearing is on December 15. In his concluding address senior cabinet minister Shivpal Singh Yadav wanted appraisals in the media of the government policies to be more informed and objective.
दैनिक भास्कर मुंबई के पत्रकार धर्मेन्द्र सिंह सड़क दुर्घटना में घायल
मुंबई में दैनिक भास्कर के फिल्म पत्रकार धर्मेन्द्र सिंह एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गये। उनके साथ यह हादसा उनके जौनपुर स्थित गांव के पास हुआ जहां वे अवकाश लेकर गये थे। बताते हैं कि धर्मेन्द्र सिंह एक दिसंबर को अपने गांव गये थे और वहां से वे बाईक से कहीं जा रहे थे तभी यह हादसा हुआ।
सहिष्णुता-असहिष्णुता का विलाप
मनोज कुमार
सहिष्णुता अथवा असहिष्णुता का यह मुद्दा उन लोगों का है जिनके पेट भरे हुए हैं। जो दिन-प्रतिदिन टेलीविजन के पर्दे पर या अखबार और पत्रिकाओं के पन्ने पर पक्ष लेते हैं दिखते हैं अथवा देश और सरकार को कोसते हैं। ये वही आमिर खान हैं जिन्होंने कभी भोपाल में कहा था कि उनकी मां उनसे कहती हैं कि बेटा, चार पैसा कमा ले। बेचारे गरीब आमिर को इस बार उनकी पत्नी कहती हैं कि देश असहिष्णु हो चला है, चलो देश छोड़ देते हैं। आमिर अपनी निजी बातें सार्वजनिक मंच से शेयर करते हैं. आमिर का यह विलाप देश की चिंता में नहीं है, यह अपने गिरते हुए फिल्मी बाजार को सम्हालने की कोशिश हैं।
सहिष्णुता अथवा असहिष्णुता का यह मुद्दा उन लोगों का है जिनके पेट भरे हुए हैं। जो दिन-प्रतिदिन टेलीविजन के पर्दे पर या अखबार और पत्रिकाओं के पन्ने पर पक्ष लेते हैं दिखते हैं अथवा देश और सरकार को कोसते हैं। ये वही आमिर खान हैं जिन्होंने कभी भोपाल में कहा था कि उनकी मां उनसे कहती हैं कि बेटा, चार पैसा कमा ले। बेचारे गरीब आमिर को इस बार उनकी पत्नी कहती हैं कि देश असहिष्णु हो चला है, चलो देश छोड़ देते हैं। आमिर अपनी निजी बातें सार्वजनिक मंच से शेयर करते हैं. आमिर का यह विलाप देश की चिंता में नहीं है, यह अपने गिरते हुए फिल्मी बाजार को सम्हालने की कोशिश हैं।
Dr B D Sharma : A Life Lived in Struggle for the Rights of Marginals
New Delhi, December 7 : Dr Brahma Dutt Sharma (known to many of us as Dr Sahab), left for passed away on December 6th in Gwalior. He was not keeping well for sometime and was being looked after by his son and daughter-in-law. Narmada Bachao Andolan and NAPM pay its heartfelt condolences to the family and to the Andolan Biradari, of which he was an integral part.
He led many battles in his life and worked tirelessly to achieve the constitutional rights of the adivasis, dalits, workers and farmers, over five decades of his working life beginning with the troublesome days in Bastar (1968) and being the last Commissioner for Scheduled Castes and Scheduled Tribes (1986-1991). He also served as the Vice Chancellor of NEHU, Central University and in numerous committess of Planning Commission and National Advisory Council.
He led many battles in his life and worked tirelessly to achieve the constitutional rights of the adivasis, dalits, workers and farmers, over five decades of his working life beginning with the troublesome days in Bastar (1968) and being the last Commissioner for Scheduled Castes and Scheduled Tribes (1986-1991). He also served as the Vice Chancellor of NEHU, Central University and in numerous committess of Planning Commission and National Advisory Council.
Dec 6, 2015
संचार टाइम्स मीडिया ने दो देशरत्नों की जयंती मनाई
आज समाज कितना संवेदनहीन हो गया है इसका ताजा उदाहरण बीते 3 दिसंबर को तब देखने को मिला जब देश के प्रथम राष्ट्रपति भारतरत्न राजेंद्र प्रसाद और वीरसपूत खुदीराम बोस की जयन्ती पर सरकार की तरफ से कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं हुआ। एक ओर अपने-अपने फायदे के लिए राजनीतिक दल देश के कुछ नायकों के नाम को कैश करने में जुटे हुए हैं तो वहीं बहुतों को भुला दिया गया है। इससे बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण घटना और नहीं हो सकती है। पर इन देश के नायकों को याद करने का काम संचार टाइम्स मीडिया ग्रुप ने किया। ३ दिसंबर की शाम देश की राजधानी दिल्ली के त्रिवेणी कला सभागार में संचार टाइम्स मीडिया ग्रुप ने देश के प्रथम राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद और क्रांतिकारी वीरसपूत खुदीराम बोस के जयंती देशभक्ति के साथ मनाया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन देश के जानेमाने कलमकार एवं जनसत्ता के पूर्व संपादक और वर्तमान में यथावत पत्रिका के संपादक पद्मश्री राम बहादुर राय ने किया।
कटिहार जिला प्रशासन ने पत्रकार के खिलाफ मुकदमा लिखाया
कटिहार प्रशासन का तानाशाह रवैया एक बार फिर देखने को मिला है। एक खबर लिखने पर एक पत्रकार पर मुक़दमा दर्ज कराया है। खबर को भ्रामक बताते हुए ये मुक़दमा कटिहार जिला प्रशासन द्वारा दर्ज कराया गया है। कटिहार के बारसोई SDO फिरोज अख्तर के अनुशंसा पर ये मुक़दमा दर्ज हुआ है।
अम्बेडकर पर संसद में चर्चा... विचार दरकिनार, सिर्फ गुणगान!
भारतीय संसद ने संविधान निर्माण में अम्बेडकर के योगदान पर दो दिन तक काफी सार्थक चर्चा करके एक कृतज्ञ राष्ट्र होने का दायित्व निभाया है .इस चर्चा ने कुछ प्रश्नों के जवाब दिये है तो कुछ नए प्रश्न खड़े भी किये है ,जिन पर आगे विमर्श जारी रहेगा .दो दिन तक सर्वोच्च सदन का चर्चा करना अपने आप में ऐतिहासिक माना जायेगा .यह इसलिये भी महत्वपूर्ण हो गया कि जो पार्टियाँ गाहे बगाहे अब तक डॉ अम्बेडकर के संविधान निर्माता होने पर संदेह प्रकट करती रही , आलोचना करती रही ,उनके भी सुर बदले है तथा उन्होंने भी माना कि संविधान निर्माण में डॉ अम्बेडकर का योगदान अतुलनीय है ,उसको नकारा नहीं जा सकता है .
राजस्थान सरकार का दलितों को तोहफा, अम्बेडकर लॉ यूनिवर्सिटी बंद करने का फैसला!
एक तरफ केंद्र की भाजपा सरकार संविधान निर्माता बाबा साहब अम्बेडकर की 125 वी जयंती का समारोह मना रही है ,वहीँ दूसरी तरफ राजस्थान की वसुंधराराजे सरकार ने अम्बेडकर के नाम पर स्थापित विधि विश्वविध्यालय को बंद करने का निर्णय ले लिया है .लोग पूछ रहे है कि क्या यह सरकार के दो साल पूरे होने पर राज्य सरकार द्वारा दलितों को दिया गया तोहफा है ?
-भंवर मेघवंशी-
राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्रसिंह राठौड़ ने विगत दिनों हुई मंत्रीमंडल की बैठक के बाद खबरनवीसों को बताया था कि राज्य सरकार ने डॉ भीमराव अम्बेडकर लॉ यूनिवर्सिटी को बंद करके इसके स्थान पर जयपुर में ‘अम्बेडकर पीठ - सेंटर फॉर एक्सीलेंस’ का गठन करने का निर्णय लिया है .राठौड़ ने इस फैसले का औचित्य बताते हुए कहा कि वर्ष 2012 -13 में अशोक गहलोत के शासन काल में अम्बेडकर लॉ यूनिवर्सिटी स्थापित की थी, मगर पूर्ववर्ती सरकार ने किसी भी प्रकार की वित्तीय व्यवस्था नहीं की ,ना शैक्षणिक अनुभाग खोले ,ना फैकल्टी नियुक्त की ,ना भूमि आवंटित की गई और ना ही प्रवेश सम्बन्धी कार्यवाही की गयी . सिर्फ कागजों में ही विश्वविध्यालय खोल दिया गया और कुलपति की भी नियुक्ति कर दी गई .इसलिये इस कागजी विश्वविध्यालय को बंद करके अम्बेडकर पीठ स्थापित करने का राज्य मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है .
-भंवर मेघवंशी-
राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्रसिंह राठौड़ ने विगत दिनों हुई मंत्रीमंडल की बैठक के बाद खबरनवीसों को बताया था कि राज्य सरकार ने डॉ भीमराव अम्बेडकर लॉ यूनिवर्सिटी को बंद करके इसके स्थान पर जयपुर में ‘अम्बेडकर पीठ - सेंटर फॉर एक्सीलेंस’ का गठन करने का निर्णय लिया है .राठौड़ ने इस फैसले का औचित्य बताते हुए कहा कि वर्ष 2012 -13 में अशोक गहलोत के शासन काल में अम्बेडकर लॉ यूनिवर्सिटी स्थापित की थी, मगर पूर्ववर्ती सरकार ने किसी भी प्रकार की वित्तीय व्यवस्था नहीं की ,ना शैक्षणिक अनुभाग खोले ,ना फैकल्टी नियुक्त की ,ना भूमि आवंटित की गई और ना ही प्रवेश सम्बन्धी कार्यवाही की गयी . सिर्फ कागजों में ही विश्वविध्यालय खोल दिया गया और कुलपति की भी नियुक्ति कर दी गई .इसलिये इस कागजी विश्वविध्यालय को बंद करके अम्बेडकर पीठ स्थापित करने का राज्य मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है .
गोइन्का पुरस्कार एवं सम्मान समारोह सम्पन्न
कमला गोइन्का फाउण्डेशन एवं हिन्दी विद्यापीठ (केरल) के संयुक्त-तत्वावधान में आयोजित समारोह में वरिष्ठ अहिन्दी भाषी साहित्यकारों के सम्मानार्थ घोषित "बालकृष्ण गोइन्का हिन्दी साहित्य सम्मान" से तिरुवनन्तपुरम् (केरल) के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. एन. चन्द्रशेखरन नायर जी को विभूषित किया गया एवं केरल के सिरमौर फिल्म अभिनेता, हिन्दी-प्रेमी पद्मश्री मधु (माधवन नायर) जी को भी "दक्षिण ध्वजधारी सम्मान" से नवाजा गया।
Dec 5, 2015
NNIS न्यूज एजेंसी ने अपने कर्मचारियों की तोड़ी कमर
स्पोर्टस न्यूज पर अपनी तास ठोकने वाली एनएऩआईएस न्यूज एजेंसी ने अपने कर्मचारियों को नाखून खाने के पर मजबूर कर दिया है... एनएनआईएस ने पिछले चार महीनों से अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया है... इसके साथ हद तो तब हुई जब दुनिया के तमाम व्यापारियों ने अपने कर्मचारियों को दिवाली पर तोहफा दिया मगर जब दिवाली पर कर्मचारियों ने खुद से ऑफिस में दिवाली पार्टी रखी तो एनएनआईएस के बॉस ने महज दो हजार रूपए देकर उसका हिसाब मांगा... एक तो वेतन नहीं दिया, उपर से दिवाली की शुभकामनाएं नहीं दी, और तो और दो हजार रूपए का हिसाब भी मांगा... जैसे पता नहीं कितना बड़ा ऐहसान कर दिया हो...
Immediately STOP the GRAVE ERROR of Journalism
Dear Mr. Sunil Baghel,
Ref: Article published by you: http://timesofindia.indiatimes.com/tech/social/Bombay-high-court-bars-ex-Tata-general-manager-from-boss-bashing-on-Facebook/articleshow/49789978.cms in
1] Ahmedabad Mirror dated 15.11.2015
2] Mumbai Mirror dated 15.11.2015
3] Pune Mirror dated 15.11.2015
4] Online as per Link above dated 15.11.2015
5] Navbharat Times, New Delhi dated 16.11.2015
6] Any other edition that I do not know
Ref: Article published by you: http://timesofindia.indiatimes.com/tech/social/Bombay-high-court-bars-ex-Tata-general-manager-from-boss-bashing-on-Facebook/articleshow/49789978.cms in
1] Ahmedabad Mirror dated 15.11.2015
2] Mumbai Mirror dated 15.11.2015
3] Pune Mirror dated 15.11.2015
4] Online as per Link above dated 15.11.2015
5] Navbharat Times, New Delhi dated 16.11.2015
6] Any other edition that I do not know
सहारा के 25 साल : हाल बेहाल
-कुमार कल्पित-
किसी और सभ्यता_संस्कृति के विषय में तो मालूम नहीं लेकिन भारतीय संस्कृति में २५ साल का बहुत महत्व होता है। तीज त्योहार के शौकीन हम भारतीय यूं भी कोई अवसर नहीं खोना चाहते । बात हम भारतीयता की भावना से ओत प्रोत होने का दंभ भरने वाले सहारा इंडिया परिवार के नियंत्रण वाले राष्ट्रीय सहारा की कर रहे। हैं। यह अखबार इस साल अपने प्रकाशन (१९९१) का २५वां वर्ष (देखे हर पृष्ठ पर २५ वर्ष वाला लोगों) मना रहा है।
किसी और सभ्यता_संस्कृति के विषय में तो मालूम नहीं लेकिन भारतीय संस्कृति में २५ साल का बहुत महत्व होता है। तीज त्योहार के शौकीन हम भारतीय यूं भी कोई अवसर नहीं खोना चाहते । बात हम भारतीयता की भावना से ओत प्रोत होने का दंभ भरने वाले सहारा इंडिया परिवार के नियंत्रण वाले राष्ट्रीय सहारा की कर रहे। हैं। यह अखबार इस साल अपने प्रकाशन (१९९१) का २५वां वर्ष (देखे हर पृष्ठ पर २५ वर्ष वाला लोगों) मना रहा है।
अखिलेश के दावों के विपरीत है यूपी का सियासी इतिहास, यूपी है बदलाव पसंद, अच्छा लगता है सत्ता परिवर्तन
अजय कुमार, लखनऊ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी धीरे-धीरे सियासी होते जा रहे है।कभी वह यूपी में महागठबंधन का शिगूफा छोड़ देते हैं तो कभी किसी कार्यक्रम के दौरान कांगे्रस के युवराज और पीएम बनने का सपना पाले राहुल गांधी की मौजूदगी में ही कांगे्रस के सामने प्रस्ताव रख देते हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में अगर मुलायम को पीएम बनाने और राहुल गांधी को डिप्टी पीएम बनाने पर कांगे्रसी राजी हो जाते हैं तो मैं (समाजवादी पार्टी) कांग्रेस से गठबंधन के लिये अभी हां कहता हॅू।अखिलेश की बात का राहुल कोई उत्तर नहीं दे पाये।
शायद अखिलेश को इस बात का अहसास है कि वह अपने पिता को पीएम बनने का सपना कांग्रेस के बिना पूरा नहीं कर सकते हैं, जबकि यूपी की गद्दी हासिल करने के लिये राज्य में मरणासन पड़ी कांगे्रस की उन्हें जरूरत नहीं पड़ेगी। इसी लिये कांगे्रस के साथ लोकसभा चुनाव में हाथ मिलाने की बात करते समय अखिलेश 2017 के विधान सभा चुनाव में कांगे्रस से गठबंधन की बात टाल देते हैं।अखिलेश के उक्त बयान को कुछ लोग शिगूफा बता रहे हैं तो ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो यह मानकर चल रहे हैं कि कांगे्रस और समाजवादी पार्टी के नेता बिहार के मुख्यमंत्री और दिल्ली का सपना देखने वाले नीतीश कुमार के कद को छोटा करने और लालू यादव को सबक सिखाने की चाहत में सियासी हमसफर बन सकते हैं।सपा नेता भूले नहीं है कि किस तरह से लालू यादव के चलते 1999 में मुलायम सिंह यादव पीएम बनते-बनते रह गये थे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी धीरे-धीरे सियासी होते जा रहे है।कभी वह यूपी में महागठबंधन का शिगूफा छोड़ देते हैं तो कभी किसी कार्यक्रम के दौरान कांगे्रस के युवराज और पीएम बनने का सपना पाले राहुल गांधी की मौजूदगी में ही कांगे्रस के सामने प्रस्ताव रख देते हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में अगर मुलायम को पीएम बनाने और राहुल गांधी को डिप्टी पीएम बनाने पर कांगे्रसी राजी हो जाते हैं तो मैं (समाजवादी पार्टी) कांग्रेस से गठबंधन के लिये अभी हां कहता हॅू।अखिलेश की बात का राहुल कोई उत्तर नहीं दे पाये।
शायद अखिलेश को इस बात का अहसास है कि वह अपने पिता को पीएम बनने का सपना कांग्रेस के बिना पूरा नहीं कर सकते हैं, जबकि यूपी की गद्दी हासिल करने के लिये राज्य में मरणासन पड़ी कांगे्रस की उन्हें जरूरत नहीं पड़ेगी। इसी लिये कांगे्रस के साथ लोकसभा चुनाव में हाथ मिलाने की बात करते समय अखिलेश 2017 के विधान सभा चुनाव में कांगे्रस से गठबंधन की बात टाल देते हैं।अखिलेश के उक्त बयान को कुछ लोग शिगूफा बता रहे हैं तो ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो यह मानकर चल रहे हैं कि कांगे्रस और समाजवादी पार्टी के नेता बिहार के मुख्यमंत्री और दिल्ली का सपना देखने वाले नीतीश कुमार के कद को छोटा करने और लालू यादव को सबक सिखाने की चाहत में सियासी हमसफर बन सकते हैं।सपा नेता भूले नहीं है कि किस तरह से लालू यादव के चलते 1999 में मुलायम सिंह यादव पीएम बनते-बनते रह गये थे।
कांग्रेस के यूपी में कमजोर पड़ने से पूरे देश में नुकसान
संजय सक्सेना,लखनऊ
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है।करीब 21 करोड़ की आबादी वाले यूपी में वर्ष 1967 तक एक आंग्ल भारतीय सदस्य को सम्मिलित करते हुए विधान सभा की कुल सदस्य संख्या 431 थी। वर्ष 1967 के पश्चात् विधान सभा की कुल सदस्य संख्या 426 हो गई। 9 नवम्बर 2000 को उ०प्र० राज्य के पुनर्गठन एवं उत्तराखण्ड के गठन के पश्चात् विधान सभा की सदस्य संख्या 403 निर्वाचित एवं एक आंग्ल भारतीय समुदाय के मनोनीत सदस्य को सम्मिलित करते हुए कुल 404 हो गई है। विधान सभा का कार्यकाल कुल 5 वर्ष का होता है यदि वह इसके पूर्व विघटित न हो गई हो। प्रथम विधान सभा का गठन 8 मार्च 1952 को हुआ था। तब से इसका गठन सोलह बार हो चुका है। वर्तमान सोलहवीं विधान सभा का गठन 8 मार्च 2012 को हुआ। यहां विधान सभा के सदस्यों की संख्या 100 है।
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है।करीब 21 करोड़ की आबादी वाले यूपी में वर्ष 1967 तक एक आंग्ल भारतीय सदस्य को सम्मिलित करते हुए विधान सभा की कुल सदस्य संख्या 431 थी। वर्ष 1967 के पश्चात् विधान सभा की कुल सदस्य संख्या 426 हो गई। 9 नवम्बर 2000 को उ०प्र० राज्य के पुनर्गठन एवं उत्तराखण्ड के गठन के पश्चात् विधान सभा की सदस्य संख्या 403 निर्वाचित एवं एक आंग्ल भारतीय समुदाय के मनोनीत सदस्य को सम्मिलित करते हुए कुल 404 हो गई है। विधान सभा का कार्यकाल कुल 5 वर्ष का होता है यदि वह इसके पूर्व विघटित न हो गई हो। प्रथम विधान सभा का गठन 8 मार्च 1952 को हुआ था। तब से इसका गठन सोलह बार हो चुका है। वर्तमान सोलहवीं विधान सभा का गठन 8 मार्च 2012 को हुआ। यहां विधान सभा के सदस्यों की संख्या 100 है।
2017 के लिये सपा का गीत लांच
संजय सक्सेना,लखनऊ
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भले ही अभी एक साल का वक्त हो, मगर समाजवादी पार्टी ने चुनावी नारों और गीतों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। मुख्य गीत के रूप में तैयार गीत ‘तरक्की का शुभारंभ, प्रगति का श्रीगणेश...अखिलेश, अखिलेश, अखिलेश’ से साफ है कि सपा अखिलेश यादव के चेहरे को आगे रखकर ‘लक्ष्य-2017’हासिल करने का प्रयास करेगी।पार्टी एक भव्य समारोह में इस गीत को लांच करेगी।यह गीत समाजवादी पार्टी में बढ़ा बदलाव होने का संकेत देते नजर आयेगा।समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2012 का विधानसभा चुनाव मुलायम सिंह यादव के नाम पर लड़ा था।
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भले ही अभी एक साल का वक्त हो, मगर समाजवादी पार्टी ने चुनावी नारों और गीतों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। मुख्य गीत के रूप में तैयार गीत ‘तरक्की का शुभारंभ, प्रगति का श्रीगणेश...अखिलेश, अखिलेश, अखिलेश’ से साफ है कि सपा अखिलेश यादव के चेहरे को आगे रखकर ‘लक्ष्य-2017’हासिल करने का प्रयास करेगी।पार्टी एक भव्य समारोह में इस गीत को लांच करेगी।यह गीत समाजवादी पार्टी में बढ़ा बदलाव होने का संकेत देते नजर आयेगा।समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2012 का विधानसभा चुनाव मुलायम सिंह यादव के नाम पर लड़ा था।
हमारे समय में भीष्म साहनी.... आयोजन की विस्तृत रिपोर्ट
घाटशिला 14 नवम्बर, 2015. कालजयी कथाकार, नाटककार, अनुवादक, रंगमंचीय कलाकार अभिनेता भीष्म साहनी के जन्म शताब्दी वर्ष 2015 में देश भर में उन्हें याद किया जा रहा है. इसी कड़ी में घाटशिला प्रलेसं ने 14 नबम्वर को ताम्र नगरी मऊभण्डार स्थित आई.सी.सी. मजदूर यूनियन (घाटशिला) में "हमारे समय में भीष्म साहनी’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया. कार्यक्रम की शुरुआत जनगीत "तू जिंदा है तो जिंदगी की जीत में यकीन कर’ (शैलेन्द्र) गाकर प्रलेसं और इप्टा के साथियों ने की. प्रथम सत्र में इसके बाद साहित्य अकादमी द्वारा निर्मित नंदन कुध्यादी निर्देशित भीष्म साहनी पर वृतचित्र का प्रदर्शन हुआ. ज्योति मल्लिक ने इस उदघाटन सत्र का संचालन किया.
द्वितीय सत्र में युवा साथियों ने गुलाब का फूल देकर मंचस्थ अतिथियों का सम्मान किया. मंच संचालन करते हुए घाटशिला के युवा कथाकार शेखर मल्ल्लिक ने भूमिका रखते हुए कहा कि, आज इस वक्त भीष्म जी को याद करने के मायने खास हैं. जिस दौर में हम आज हैं, वह एक ऐसा समय है, जिसमें भीष्म साहनी को याद किया जाना जरूरी है. प्रगतिशील और समतावादी रचनाकार भीष्म जी प्रेमचंद की परम्परा को आगे ले जाने वाले, आम आदमी को रचना में उसकी पुरी ताकत और कमजोरियों के साथ खड़ा करने वाले लेखक हैं. उनकी रचनाएँ साम्प्रदायिकता का सिर्फ़ निषेध नहीं करतीं, बल्कि उनके कारणों की तह तक जाती हैं और हमें उस नब्ज को पकड़ने के लिये उकसाती है. एक तरफ जहाँ गंगो का जाया, बसंती जैसी कहानियाँ और उपन्यास हैं, जो हमें श्रमिक निम्न मध्यवर्ग से वावस्ता कराती हैं, उनके शोषण और संघर्ष का यथार्थ दिखाती हैं, तो दूसरी तरफ अमृतसर आ गया जैसी कहानी , तमस जैसा उपन्यास और आलमगीर, मुआवजे जैसे नाटक लिखकर उन्होंने साम्प्रदायिकता की सच्चाईयों को भी बेनकाब किया है.
द्वितीय सत्र में युवा साथियों ने गुलाब का फूल देकर मंचस्थ अतिथियों का सम्मान किया. मंच संचालन करते हुए घाटशिला के युवा कथाकार शेखर मल्ल्लिक ने भूमिका रखते हुए कहा कि, आज इस वक्त भीष्म जी को याद करने के मायने खास हैं. जिस दौर में हम आज हैं, वह एक ऐसा समय है, जिसमें भीष्म साहनी को याद किया जाना जरूरी है. प्रगतिशील और समतावादी रचनाकार भीष्म जी प्रेमचंद की परम्परा को आगे ले जाने वाले, आम आदमी को रचना में उसकी पुरी ताकत और कमजोरियों के साथ खड़ा करने वाले लेखक हैं. उनकी रचनाएँ साम्प्रदायिकता का सिर्फ़ निषेध नहीं करतीं, बल्कि उनके कारणों की तह तक जाती हैं और हमें उस नब्ज को पकड़ने के लिये उकसाती है. एक तरफ जहाँ गंगो का जाया, बसंती जैसी कहानियाँ और उपन्यास हैं, जो हमें श्रमिक निम्न मध्यवर्ग से वावस्ता कराती हैं, उनके शोषण और संघर्ष का यथार्थ दिखाती हैं, तो दूसरी तरफ अमृतसर आ गया जैसी कहानी , तमस जैसा उपन्यास और आलमगीर, मुआवजे जैसे नाटक लिखकर उन्होंने साम्प्रदायिकता की सच्चाईयों को भी बेनकाब किया है.
मान्यता प्राप्त पत्रकारों को मिले केजीएमयू में निशुल्क इलाज
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक ने संजय गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान के तर्ज पर किंगजार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में भी राज्य मुख्यालय के मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिये निःशुल्क इलाज की ब्यवस्था कराए जाने का आश्वासन दिया है. उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में किंग जार्ज के कुलपति से विचार-विमर्श करने के बाद शीघ्र ही यह ब्यवस्था लागू कराने का प्रयास करूंगा.
गजब की नेतृत्व क्षमता है विपिन धूलिया में!
-आशीष अग्रवाल-
"सन 1982 मे दिल्ली से जनसत्ता शुरू होने के बाद उस के तेवरों ने बेशक पत्रकारिता को नए आयाम दिये ,मगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश मे विपिन धूलिया पहले पत्रकार थे जिसने उससे भी आगे बढ़कर मौलिकता के साथ अखबार और खबरों के साथ पत्रकारों के हितों के मोर्चे पर एक साथ काम किया । इस सबसे अलग उन्होने कभी किसी पत्रकार के अनुचित व्यवहार या खबर को प्रश्रय नहीं दिया।बल्कि पत्रकारों की नयी पीढ़ी को तैयार करने में उनकी हमेशा रूचि रही,जो अब IFWJ में भी दिखाई देगी।"
मोदी के कारण रेडियो श्रोताओं की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है
डॉ. कठेरिया के नेतृत्व में वर्धा शहर के रेडियो श्रोताओं पर हुआ शोध
जागरूकता बढ़ाने में रेडियो कारगर : अध्ययन में प्राप्त 87 प्रतिशत आंकड़े यह दर्षाते हैं कि रेडियो जन-जागरूकता बढ़ाने में महत्वपर्णू भूमिका अदा कर रहा है। 53 प्रतिशत प्रतिभागी मानते हैं कि सरकारें रेडियो का उपयोग अपने पक्ष में जनमत निर्माण के लिए करती आई हैं यह सर्वविदित है कि सत्तासीन सरकारें हमेशा से संचार माध्यमों का उपयोग अपने पक्ष में जनमत निर्माण के लिए करती आईं हैं। राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने में रेडियो की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है 74 प्रतिशत प्राप्त आंकड़े यह दर्षाते हैं कि रेडियो राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने में आज विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सशक्त भूमिका निभा रहा है।
जागरूकता बढ़ाने में रेडियो कारगर : अध्ययन में प्राप्त 87 प्रतिशत आंकड़े यह दर्षाते हैं कि रेडियो जन-जागरूकता बढ़ाने में महत्वपर्णू भूमिका अदा कर रहा है। 53 प्रतिशत प्रतिभागी मानते हैं कि सरकारें रेडियो का उपयोग अपने पक्ष में जनमत निर्माण के लिए करती आई हैं यह सर्वविदित है कि सत्तासीन सरकारें हमेशा से संचार माध्यमों का उपयोग अपने पक्ष में जनमत निर्माण के लिए करती आईं हैं। राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने में रेडियो की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है 74 प्रतिशत प्राप्त आंकड़े यह दर्षाते हैं कि रेडियो राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने में आज विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सशक्त भूमिका निभा रहा है।
डॉ. आंबेडकर : आधुनिक भारत के निर्माता
-एस.आर. दारापुरी आई.पी.एस.(से.नि.)
डॉ. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर एक अछूत परिवार में पैदा हुए थे जो सभी प्रकार के सामाजिक, शैक्षिक, धार्मिक व राजनीतिक अधिकारों से वंचित वर्ग था. इसके बावजूद भी उनकी गिनती दुनिया के सबसे अधिक शिक्षित लोगों में की जाती है. उनके पास अमेरिका, इंग्लैण्ड तथा जर्मनी की उच्च डिग्रियां थीं. इतना शिक्षित होते हुए भी उन्हें समाज में घोर अपमान का सामना करना पड़ा. जब वे महाराजा बड़ोदा के दरबार में सैनिक सलाहकार के उच्च पद पर नियुक्त हुए तो उन्हें इतना अपमानित होना पड़ा कि उन्हें यह नौकरी छोड़नी पड़ी. जाति अपमान से तंग आ कर उन्होंने कभी भी नौकरी न करने का निर्णय लिया तथा इंग्लैण्ड से वकालत पास कर स्वतंत्र रूप से बम्बई में वकालत शुरू कर दी.
डॉ. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर एक अछूत परिवार में पैदा हुए थे जो सभी प्रकार के सामाजिक, शैक्षिक, धार्मिक व राजनीतिक अधिकारों से वंचित वर्ग था. इसके बावजूद भी उनकी गिनती दुनिया के सबसे अधिक शिक्षित लोगों में की जाती है. उनके पास अमेरिका, इंग्लैण्ड तथा जर्मनी की उच्च डिग्रियां थीं. इतना शिक्षित होते हुए भी उन्हें समाज में घोर अपमान का सामना करना पड़ा. जब वे महाराजा बड़ोदा के दरबार में सैनिक सलाहकार के उच्च पद पर नियुक्त हुए तो उन्हें इतना अपमानित होना पड़ा कि उन्हें यह नौकरी छोड़नी पड़ी. जाति अपमान से तंग आ कर उन्होंने कभी भी नौकरी न करने का निर्णय लिया तथा इंग्लैण्ड से वकालत पास कर स्वतंत्र रूप से बम्बई में वकालत शुरू कर दी.
यूपी में किसी की भी सरकार आ सकती है, लेकिन भाजपा की नहीं
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
'अनार्य एकता और सक्रियता' के मकसद से मैं 22 नवम्बर, 15 से 27 नवम्बर तक लखनऊ, वाराणसी, आगरा, झांसी और ग्वालियर के दौरे पर गया। इस बीच अनेक मित्रों और आम जनता से रूबरू हुआ। जानकार और अनजान लोगों के विचार जाने।
इसी क्रम में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी से शुरू करते हैं, जिसे मोदी और उनके भक्त मोक्षदायनी काशी कहना पसन्द करते हैं। वहां के रेलवे स्टेशन, जिसे वहां स्थानीय स्तर पर कैंट रेलवे स्टेशन भी बोला जाता है, के पास स्थित भीड़भाड़ वाली एक चाय की दुकान पर, चाय वाले को सम्बोधित मेरा सीधा सवाल—
''इस बार यूपी में किसकी सरकार आने की सम्भावना है?''
चायवाला—''किसी की भी आ सकती है, लेकिन भाजपा नहीं।''
क्या मायावती संघ के एजेंडे को आगे बढा रही हैं?
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
राज्यसभा में 30 अगस्त, 2015 को मायावती ने सवर्ण गरीबों को आर्थिक आधार पर आरक्षण प्रदान करने की मांग करके, अवसरवादी राजनीति के घृणित चेहरे को आगे बढाया है। गरीब सवर्णों को आरक्षण की मांग करके मायावती वोट की राजनीति तो कर सकती हैं, लेकिन अनार्यों के संवैधानिक हकों की रक्षा करने का दावा नहीं कर सकती। अब मायावती को दलित, आदिवासी, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हितों की माला जपने का कोई नैतिक अधिकार शेष नहीं रह गया है। हजारों सालों से आर्यों के शोषण, विभेद, अन्याय, अत्याचार और मनमानी के शिकार वंचित—अनार्यों को सत्ता और प्रशासन में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रदान करने के मकसद से संविधान निर्माताओं में ने सामाजिक न्याय की व्यवस्था की हुई है। जिसका मायावती मजाक उड़ा रही हैं। मायावती का बयान इस बात का जीता जागता प्रमाण है कि मायावती को संविधान और सामाजिक न्याय का प्राथमिक स्तर तक का ज्ञान नहीं है। उन्हें कांशीराम की शिष्या और उत्तराधिकारी कहलाने का कोई नैतिक हक नहीं है! कहीं ऐसा तो नहीं कि आगे चलकर मायावती भी भाजपा की नाव पर सवार होने की तैयारी कर रही हैं?
राज्यसभा में 30 अगस्त, 2015 को मायावती ने सवर्ण गरीबों को आर्थिक आधार पर आरक्षण प्रदान करने की मांग करके, अवसरवादी राजनीति के घृणित चेहरे को आगे बढाया है। गरीब सवर्णों को आरक्षण की मांग करके मायावती वोट की राजनीति तो कर सकती हैं, लेकिन अनार्यों के संवैधानिक हकों की रक्षा करने का दावा नहीं कर सकती। अब मायावती को दलित, आदिवासी, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हितों की माला जपने का कोई नैतिक अधिकार शेष नहीं रह गया है। हजारों सालों से आर्यों के शोषण, विभेद, अन्याय, अत्याचार और मनमानी के शिकार वंचित—अनार्यों को सत्ता और प्रशासन में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रदान करने के मकसद से संविधान निर्माताओं में ने सामाजिक न्याय की व्यवस्था की हुई है। जिसका मायावती मजाक उड़ा रही हैं। मायावती का बयान इस बात का जीता जागता प्रमाण है कि मायावती को संविधान और सामाजिक न्याय का प्राथमिक स्तर तक का ज्ञान नहीं है। उन्हें कांशीराम की शिष्या और उत्तराधिकारी कहलाने का कोई नैतिक हक नहीं है! कहीं ऐसा तो नहीं कि आगे चलकर मायावती भी भाजपा की नाव पर सवार होने की तैयारी कर रही हैं?
पत्रकार अरुण कुमार ने किशोरवय में ही 'पढ़ाई-लड़ाई साथ-साथ' के सूत्र को जीवन का राग मान लिया (देखिए स्मृति सभा की तस्वीरें)
टाइम्स ऑफ़ इण्डिया पटना के सेवानिवृत वरिष्ठ पत्रकार, प्रेस कोंसिल ऑफ़ इण्डिया के पूर्व सदस्य, बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महासचिव और टाइम्स एम्प्लॉइज यूनियन पटना के अध्यक्ष दिवंगत अरुण कुमार की स्मृति में रविवार 29 नवम्बर 2015 को पटना के गांधी संग्रहालय में टाइम्स इम्प्लोइज यूनियन की ओर से एक स्मृति सभा का आयोजन किया गया। इस सभा की अध्यक्षता जानेमाने साहित्यकार खगेन्द्र ठाकुर ने की। स्मृति सभा का संचालन करते हुए नंदीग्राम डायरी के लेखक-पत्रकार पुष्पराज ने अरुण कुमार की जिंदगी से जुडी अतीत की परतों को सार्वजनिक किया।
पुष्पराज ने बताया कि अरुण कुमार के पिता स्कूल सुपरिटेंडेंट के साथ-साथ कम्युनिष्ट पार्टी के आजीवन सदस्य रहे। उनके पिता कॉमरेड रामचन्द्र सिंह अपने वेतन का एक बड़ा हिस्सा हर माह लेबी के रूप में पार्टी को देते थे। वे दिन में सरकार की नौकरी करते थे और रात में पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच कम्युनिज्म पढ़ाते थे। अरुण कुमार के ससुर कॉमरेड रामप्रताप सिंह पार्टी को लेबी देने वाले प्रतिष्ठित कम्युनिष्ट आइडिओलॉग थे। अरुण कुमार ने किशोरवय में ही पढ़ाई-लड़ाई साथ-साथ के सूत्र को जीवन का राग मान लिया। सरकारी सेवा के साथ कम्युनिष्ट होने की सजा में पिता को लगातार तबादले की सजा भुगतनी पड़ी। अरुण कुमार को पिता के तबादले की वजह से हर दो साल पर स्कूल बदलना पड़ा।
पुष्पराज ने बताया कि अरुण कुमार के पिता स्कूल सुपरिटेंडेंट के साथ-साथ कम्युनिष्ट पार्टी के आजीवन सदस्य रहे। उनके पिता कॉमरेड रामचन्द्र सिंह अपने वेतन का एक बड़ा हिस्सा हर माह लेबी के रूप में पार्टी को देते थे। वे दिन में सरकार की नौकरी करते थे और रात में पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच कम्युनिज्म पढ़ाते थे। अरुण कुमार के ससुर कॉमरेड रामप्रताप सिंह पार्टी को लेबी देने वाले प्रतिष्ठित कम्युनिष्ट आइडिओलॉग थे। अरुण कुमार ने किशोरवय में ही पढ़ाई-लड़ाई साथ-साथ के सूत्र को जीवन का राग मान लिया। सरकारी सेवा के साथ कम्युनिष्ट होने की सजा में पिता को लगातार तबादले की सजा भुगतनी पड़ी। अरुण कुमार को पिता के तबादले की वजह से हर दो साल पर स्कूल बदलना पड़ा।
भारतीय प्रेस परिषद की उपसमिति ने किया उत्तराखंड का दौरा, कई मुद्दों पर की बात
देहरादून। प्रेस काउंसिल आफ इंडिया की उप समिति ने बीजापुर अतिथि गृह के सभागार में सचिव सूचना विनोद शर्मा के साथ बैठक की। समिति में प्रेस काउंसिल आफ इंडिया के सदस्यों में संयोजक गुरिन्दर सिंह सदस्य पीके दास ने बताया कि उनके द्वारा देहरादून में विभिन्न पत्रकार संगठनों एवं पत्रकारों के साथ बैठक की गई। पत्रकार संगठनों से राज्य सरकार द्वारा पत्रकारों के हितों लिये गये निर्णयों की जानकारी ली गई। साथ ही पत्रकारों की समस्याओं का भी संज्ञान लिया गया।
31 साल के महान दानी यानि मार्क जुकरबर्ग से हम क्या सीख सकते हैं
वेद प्रताप वैदिक
मार्क जुकरबर्ग को कौन नहीं जानता? लेकिन अब जुकरबर्ग को दुनिया के सबसे बड़े दानियों में से जाना जाएगा। यों तो जुकरबर्ग पहले भी करोड़ों डालर दान कर चुके हैं और जुकरबर्ग से पहले भी अरबों डालर दान करने वाले लोग हुए हैं लेकिन जुकरबर्ग ने अपनी बेटी के जन्म के अवसर पर दान की जो घोषणा की है, उसने उन्हें दुनिया का अद्वितीय दानी बना दिया है। बिल गेट्स, वारेन बफे और जार्ज सोरेस जैसे लोगों ने भी बड़े-बड़े दान देकर अन्तरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित की है लेकिन इनमें से जुकरबर्ग ही ऐसा पहला दानी है, जिसकी उम्र सिर्फ 31 साल है। 30-31 साल की उम्र क्या होती है? इसे खेलने-खाने की उम्र कहा जाता है। यदि इस उम्र में कोई आदमी अरबपति बन जाए तो उसके क्या कहने? वह जो भी नखरे पाले, वे कम होते हैं लेकिन जुकरबर्ग ने अपनी ‘फेसबुक’ की संपत्ति का 99 प्रतिशत दान कर दिया है। लगभग तीन लाख करोड़ रु. की इस राशि से दुनिया के गरीब बच्चों के कल्याण की कई योजनाएं बनेंगी।
मार्क जुकरबर्ग को कौन नहीं जानता? लेकिन अब जुकरबर्ग को दुनिया के सबसे बड़े दानियों में से जाना जाएगा। यों तो जुकरबर्ग पहले भी करोड़ों डालर दान कर चुके हैं और जुकरबर्ग से पहले भी अरबों डालर दान करने वाले लोग हुए हैं लेकिन जुकरबर्ग ने अपनी बेटी के जन्म के अवसर पर दान की जो घोषणा की है, उसने उन्हें दुनिया का अद्वितीय दानी बना दिया है। बिल गेट्स, वारेन बफे और जार्ज सोरेस जैसे लोगों ने भी बड़े-बड़े दान देकर अन्तरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित की है लेकिन इनमें से जुकरबर्ग ही ऐसा पहला दानी है, जिसकी उम्र सिर्फ 31 साल है। 30-31 साल की उम्र क्या होती है? इसे खेलने-खाने की उम्र कहा जाता है। यदि इस उम्र में कोई आदमी अरबपति बन जाए तो उसके क्या कहने? वह जो भी नखरे पाले, वे कम होते हैं लेकिन जुकरबर्ग ने अपनी ‘फेसबुक’ की संपत्ति का 99 प्रतिशत दान कर दिया है। लगभग तीन लाख करोड़ रु. की इस राशि से दुनिया के गरीब बच्चों के कल्याण की कई योजनाएं बनेंगी।
सेल्फी पत्रकारिता के मायने
यह पत्रकारिता की नई रीत नहीं है और ना ही यह सेल्फी पत्रकारिता है। यह सौफीसदी मीडिया है और इसे सेल्फी मीडिया ही कहा जाना बेहतर होगा। पत्रकारिता अपने जन्म से लेकर आज तक सत्ता के संग-साथ चलने को न कभी आतुर हुई और न ही कभी विवश। वह तो सत्ता को गरियाने और जगाने का काम करती रही है और करती रहेगी। सच तो यह है कि जिसे हम सेल्फी पत्रकारिता का नाम दे रहे हैं, वहां पत्रकारिता है कहां पर? क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ सेल्फी लेने वाले मीडिया साथियों ने इस पर कोई खबर लिखी या इस सेल्फी पत्रकारिता के पीछे कोई कथा सामने आयी जिससे समाज का भला होता? जवाब ना में होगा क्योंकि यह न तो सेल्फी पत्रकारिता है और न पत्रकारिता बल्कि यह एक किस्म का व्यक्तिगत आनंद का समय होता है जब ज्यादतर युवा पत्रकार प्रधानमंत्री के साथ अपनी यादें संजोकर रखना चाहते हैं। इसमें कोई बुराई भी नहीं है। जीवन के सुखद क्षणों को संजोकर रखना कतई गलत नहीं है लेकिन इसे पत्रकारिता या मीडिया का नाम दिया जाना उचित नहीं है।
climate change : next 15 years are critical...
Dear all,
Himalaya Niti Abhiyan organised 15 day Himachal Pradesh state wide Swaraj Abhiyan Yatra focusing on local self governance, forest rights and climate justices form 21 November 2015 to 5 December 2015 in first phase. We released below declaration on climate justice. Yatra was launched from Ricong pio Kinour on 21 Nov. and ended on 4th Dec. at Jadera Chamba. Second phase will be launched after break and will culminate on 24th of Dec. at Balichouki Mandi. Declaration on climate justice is...
Himalaya Niti Abhiyan organised 15 day Himachal Pradesh state wide Swaraj Abhiyan Yatra focusing on local self governance, forest rights and climate justices form 21 November 2015 to 5 December 2015 in first phase. We released below declaration on climate justice. Yatra was launched from Ricong pio Kinour on 21 Nov. and ended on 4th Dec. at Jadera Chamba. Second phase will be launched after break and will culminate on 24th of Dec. at Balichouki Mandi. Declaration on climate justice is...
Dec 2, 2015
मायावती की आर्थिक आधार पर आरक्षण और अति-पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल करने की मांग दलित विरोधी
लखनऊ
: मायावती ने राज्यसभा में मांग की है कि उत्तर प्रदेश की 17 अति-पिछड़ी
जातियों को अनुसूचित जाति की सूचि में शामिल किया जाये और गरीब सवर्णों को
आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाये. मायावती की यह मांग दलित विरोधी है. यह
बात आज एस.आर. दारापुरी पूर्व पुलिस महानिरीक्षक एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता,
आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने प्रेस को जारी की गयी विज्ञप्ति में कही है.
उन्होंने आगे बताया कि मायावती यह मांग उठा कर अति पिछड़ी जातियों को केवल
वोट लेने के लिए गुमराह कर रही है.
Bisleri sells on MRP but farmer's produce on MSP!
Seventh Pay Commission has addressed grievience of 6 cr Govt servant but unfortunately 60 crs farmers of the country are suffering endlessly. their plights are going unanswered. All signals in economy are showing dwindling agricultural produce but rather then supporting own farmers, govt is boasting of efficiency in importing food grain and pulses. Dhirendra Singh addressed a farmer gathering at Falaida village in GB nagar bordering Haryana. This panchayat is a part of regular farmer movement going on in areas of western UP. Tempers across areas are on rise as the problems are not coming to end for the farming community and they are feeling cheated, as inspite of being the largest, most vulnerable, most affected community, their demands are going unanswered, Said Dhirendra Singh.
Bhopal Gas Tragedy completed 31 years of injustice and betrayal
While several scientific studies have shown the genetic impact of the Union Carbide disaster and the effect on the next generation; neither the state nor the central government has provided any medical care or rehabilitation. The survivors of the world's largest industrial accident continue to struggle in Bhopal – even for shamelessly low amounts of compensation, health facilities and cleaning-up of the plant site even after 30 years.
Nov 27, 2015
Stop Water for Coca-Cola: 18 Village Councils in India
New Delhi: Eighteen village councils (panchayats) in the immediate vicinity of the Coca-Cola bottling plant in Mehdiganj in Varanasi district in India have come together to demand that the groundwater used by Coca-Cola be stopped immediately due to the growing water crisis in the area.
Panchayats, or village councils, are elected bodies at the most local level, villages, in India.
Panchayats, or village councils, are elected bodies at the most local level, villages, in India.
President agrees Award-wapsi a way of protest
A delegation on behalf the writers, artists, scientists and academics consisting of the poet Ashok Vajpeyi, the painter Vivan Sundaram and the journalist Om Thanvi called upon the President of India Shri Pranab Mukherjee on 25th November 2015 thanking him for speaking repeatedly against growing intolerance and requesting him ‘as the head of the nation to do all that is possible to advise and persuade Governments, both of the States and the Centre, political parties and all others to act decisively so that the ethos of tolerance, mutual cooperation, respect for plurality and difference, scope for dissent and dialogue, freedom of expression are all ensured and given full and free expression both in deeds and words’.
Delhi govt introduces bill to bring changes in Working Journalists Act
Delhi government introduced a Bill proposing amendments to the Working Journalists Act that envisaged imprisonment of up to one year and penalty extending to ten thousand rupees for any violations.
Removal of No Detention Policy will be disastrous for the RTE Act
The Right to Education (RTE) strongly condemns the proposal of the Delhi government to amend the RTE ACT, 2009, calling the move completely illegal and against the fundamental right to education. Mr. Ambarish Rai, Convener, RTE Forum stated that ‘The consequence of detaining a child in the same class works adversely on the child’s psyche and has an impact on his/her self-esteem.
Nov 21, 2015
Medimix Soaps launched in Sri Lanka
Aggressive overseas distribution plans on the anvil by Cholayil P Ltd
Chennai – November 21, 2015 – Leading FMCG player, Chennai headquartered Cholayil Private Ltd, today announced the launch of its flagship Medimix soaps in Sri Lanka. With this launch, the company’s products are now available in 26 overseas nations, besides the Indian market, excluding S India.
Chennai – November 21, 2015 – Leading FMCG player, Chennai headquartered Cholayil Private Ltd, today announced the launch of its flagship Medimix soaps in Sri Lanka. With this launch, the company’s products are now available in 26 overseas nations, besides the Indian market, excluding S India.
‘Meri Awaaz Suno’, a music and dance show for Differently abled artists
New Delhi : Doordarshan Kendra, Delhi is organizing the second leg of ‘Meri Awaaz Suno’, featuring the best of Hindi film music duet songs, on Sunday, 22nd November 2015 at Siri Fort Auditorium, Delhi from 4 pm to 7 pm.
Movement for Land Rights : Joint Alliance to Intensify Opposition to Anti-People Land Policies
: December 15 Chetavani Rally at Sansad Marg : Extends Support to struggle of Karchana peasants against Jaypee Associates, Demand Release of 42 in Jail : Condemn Maharashtra government notification allowing easy conversion of agricultural land to industrial purposes : Demand Special Compensation Package to Draught Affected Farmers : Centre must Withdraw Environment Amendment Bill 2015 : Representatives of 22 States and over hundred people's movements, peasant unions and farmers’ organisations under Bhumi Adhikar Andolan decide on comprehensive agenda to achieve land rights and fight forced land acquisition, agrarian crisis and fascist politics :
New Delhi, November 20, 2015 : A two day national meeting was held on November 19 – 20, at Indian Social Institute, delegates from 22 states representing over 100 mass organisations converged, and discussed in detail the challenges facing the land rights movement and people of the country today. Bhumi Adhikar Andolan (BAA) brought together struggles against the draconian Land Acquisition Ordinance brought by the Narendra Modi led BJP Government and played a significant role in defeating the move. The BJP Government is now trying to push through State level legislations to allow land grab in the illusion that such united resistance would not be possible at the State level.
New Delhi, November 20, 2015 : A two day national meeting was held on November 19 – 20, at Indian Social Institute, delegates from 22 states representing over 100 mass organisations converged, and discussed in detail the challenges facing the land rights movement and people of the country today. Bhumi Adhikar Andolan (BAA) brought together struggles against the draconian Land Acquisition Ordinance brought by the Narendra Modi led BJP Government and played a significant role in defeating the move. The BJP Government is now trying to push through State level legislations to allow land grab in the illusion that such united resistance would not be possible at the State level.
He Died on Diwali Inside a Sewage Pipe
-Subhashini Ali-
subhashiniali@gmail.com
In a few days, on the 29th of November, a group of four safai karmacharis (sweepers) and three beldars (diggers) along with three more senior persons, all working for the New Delhi Municipal Council (NDMC), will be returning from a week-long official trip to Japan and South Korea where they are learning first-hand about sanitation, cleanliness, waste disposal as well as the maintenance of urban colonies, markets etc. The NDMC Chairman, Naresh Kumar, said, "We took the decision to boost their morale".No one Killed the Dalits by Meena Kandasamy
First part of the transcript of Meena Kandasamy's speech 'No One Killed the Dalits', delivered on 7th Anuradha Gandhy Memorial lecture has been published at Towards a New Dawn. here is a portion of the transcript-
"I will begin by saying that in the past few days, we have been hearing and sharing pictures of the lynching of two Dalit children in Faridabad- Vaivab and Divya. And it is something that is very shocking and at the same time very graphic. But I will start by telling you that the killing of children is a caste Hindu speciality. From our memories of Gujarat genocide in 2002, we cannot forget the bodies of children which were lined up, arranged next to each other. And there is a long history of the killing of small children. If we look at the massacre in Kilvenmani that happened on Christmas day, 1968; 23 children were killed. All of them were burnt to death. In fact it was not just that the children were locked up in a hut and burnt to death but there is one episode which anybody in Kilvenmani tells you again and again. And it is the episode of how one of the mothers of a child in a last desperate attempt to save the child threw the child outside, hoping that somebody will save the baby, somebody in the mob would have the humanity to save this child. But they basically chopped the baby into pieces and put the baby back in the hut and set the hut on fire. So this is the caste Hindu humanity that we have in this country.
"I will begin by saying that in the past few days, we have been hearing and sharing pictures of the lynching of two Dalit children in Faridabad- Vaivab and Divya. And it is something that is very shocking and at the same time very graphic. But I will start by telling you that the killing of children is a caste Hindu speciality. From our memories of Gujarat genocide in 2002, we cannot forget the bodies of children which were lined up, arranged next to each other. And there is a long history of the killing of small children. If we look at the massacre in Kilvenmani that happened on Christmas day, 1968; 23 children were killed. All of them were burnt to death. In fact it was not just that the children were locked up in a hut and burnt to death but there is one episode which anybody in Kilvenmani tells you again and again. And it is the episode of how one of the mothers of a child in a last desperate attempt to save the child threw the child outside, hoping that somebody will save the baby, somebody in the mob would have the humanity to save this child. But they basically chopped the baby into pieces and put the baby back in the hut and set the hut on fire. So this is the caste Hindu humanity that we have in this country.
The New War on Terror : It might last longer than the Cold War
-Shruti Vyas-
Words somehow have a way of coming back to haunt us. The first time we millennial kids heard and screamed of ‘war’ was 14 years ago, when American President George W Bush in the aftermath of 9/11 declaring a ‘war on terror’. Fast forward to this tumultuous new world of 2015, and we see it splashed all over again. After the merciless attack on Paris, France’s President Francois Hollande spoke with the same persuasion that “there will be a war which will be pitiless”. The war that started 14 years ago has been declared once again.
Nov 20, 2015
Bonita launches in-a-first health-friendly stainless steel bowls fit for microwave use.
· Paradise Microwavable Freeze Bowls will provide alternative to plastic, which is touted as unsafe for heating purposes
· Available in a set of three eye-catchy bowls, each one is good to freeze, store, reheat and serve food
In no less than a revolution, India’s leading home utility maker -- Bonita -- has launched stainless steel bowls which can be used in microwave for heating purposes, finally bringing to an end worries of homemakers who until now had no option other than using plastic utensils, some of which are rendered unsafe for health.
· Available in a set of three eye-catchy bowls, each one is good to freeze, store, reheat and serve food
In no less than a revolution, India’s leading home utility maker -- Bonita -- has launched stainless steel bowls which can be used in microwave for heating purposes, finally bringing to an end worries of homemakers who until now had no option other than using plastic utensils, some of which are rendered unsafe for health.
An Invitation : Samaj, Sanshadhan and Samividhan Bachao National Convention December 6, New Delhi
SAMAAJ – SANSADHAN – SANVIDHAN BACHAO
NATIONAL CONVENTION
&
Felicitation of Intellectuals, Writers and Cultural Activists
6 December 2015 | 9 AM – 5 PM
Gandhi Peace Foundation, Deen Dayal Upadhyaya Marg, New Delhi, 110002
AN INVITATION
In a Government of India advertisement numbered DAVP22201/13/0048/1415, which was published on 26 January 2015 – the words ‘Socialist’ and ‘Secular’ were ominously missing from the Preamble.[1]
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